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अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (रजि-1908)

Gurjar Bhawan, Kotala, Patparganj

महासभा के स्थायी आयोजन - 8 मार्च , स्थापना दिवस सम्मान समारोह दिल्ली के अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के हेड ऑफिस में मनाया जायेगा | सरदार पटेल जयंती 31 अक्टूबर 2017 को मनाया जायेगा | सम्राट मिहिर भोज - 14 सितम्बर के अलग-अलग प्रान्तों के गुर्जर महासभा के भवन में मनाया जायेगा |

History

श्री अफलासिंह वर्मा ने 1960 में एक संगठन दिल्ली प्रदेष में बनाया था जिसका नाम उन्होने दिल्ली प्रदेष गुर्जर सभा रखा, श्री अफलासिंह वर्मा ने कुछ नवयुवको को विषेशत जो राजकीय सेवा में थे, इक्ट््ठा करके एक संगठन बनाया था। जिसकी बैठके गॉव-2 में हुआ करती थी वर्तमान बैठक में यह तय हो जाता था कि अगली बैठक उस गॉव में होगी, और कार्यक्रमानुसार लोग उसी गॉंव में पहुॅच जाते थे, आतिथ्य के नाम पर गॉंव की चौपाल और विछाने के लिये पल्ल लेते थे। उन्होने यह भी तय किया था कि गॉंव वालो से बैठक के दिन चाय नही पियेगें तब लोग अपने -2 साधन से उस गॉंव तक पहुचते थे। प्राय दोपहर बाद का समय रखा जाता था संगठन के कार्यालय के नाम पर वर्मा जी के स्कूटर पर एक ब्रीफकेस जिसमें एक रजिस्टर होता था, जिसमें आने वाले लोगो की उपस्थिति एवं बैठक की कार्यवाही होती थी।

1965 के अखिल भारतीय गुर्जर समाज सुधार सभा का बदरपुर में सम्मेलन हुआ यह अति विषाल और भव्य था और इसमें अगले अध्यक्ष का चुनाव हुआ था सभा का गठन हुआ था सभा अध्यक्ष पद पर लेफ्टी0 कर्नल गिरधारी सिंह को मनोनीत किया गया और देष के अन्य गुर्जर बहुल प्रदेषो से सत्य निश्ठ और समाजसेवी व्यक्तियों का सभा की कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया था चूकि मैंने अभी तक सभा में भागीदारी नही की थी।

उस समय जो लोग आये थे वे चौ0 जसवन्त सिंह मदनपुर, चौ0 छज्जनसिंह सरायकाले खांॅ, चौ0 रघुवर सिंह सरायकाले खॉ,चौ0 फतह सिंह जगतपुर, श्री रामचन्द्र विकल विधायक उत्तर प्रदेष, श्री हरिसिंह नलवा एड़वोकेट, श्री कन्हैया लाल पोशवाल मंत्री हरियाणा, श्री महाराजसिंह एड़वोकेट मध्यप्रदेष, श्री लेखराजसिहं एड़वोकेट बुलन्दषहर, श्री नारायणसिंह कोटला, श्री तिलकराम, श्री षानचन्द, श्री राजेन्द, श्री बलजीत, श्री चरणसिंह प्रमुख रूप से आये थे, महासभा के सविधान की सरचना भी हुयी थी और सभा का यह सम्मेलन 3 दिन का था षायद महासभा के इतिहास मे यह सबसे भव्य भी था। स्थान था बदरपुर का परेड ग्राऊन्ड जो अपने आकार में भी भव्य था और आवागमन के साधन भी सुलभ थे। व्यवस्था भी अति सुन्दर थी इस सम्मेलन में जनरल जे.एन. चौधरी भारत के सेना अध्यक्ष को विषेश रूप से आमंत्रित किया गया चूंकि गुर्जर रेजिमेन्ट सेना में बने यह प्रमुख मांग रखी गयी थी अन्य तत्कालीन मांग भी थी। और जम्मू कष्मीर से वजीर मो0 हाकॅंला, मो0 षमी खटाना, मिया बषीर अहमद, चौ0 गुलजार अहमद, चौ0 लाल मोहम्मद साविर, मौ0 असलम भी आये हुऐ थे वही पंजाब से भी कई सरदार गुर्जर भी आये थे, इस प्रकार यह एक गुर्जर संस्कृति का संगम था।

इसमें कर्नल गिरधारीसिंह अध्यक्ष एवं चौ0 नारायण सिंह को महामंत्री बनाया गया यद्यपि चौ0 जसवन्त सिंह ही सभा का कार्य भार सम्भाल लेते थे। इसके पष्चात अखिल भारतीय गुर्जर महासभा का कार्य था केवल हर 5 वर्श के वाद जो एम.एल.ए. चुनकर आते थे उनका अभिनन्दन करते थे। 1971 तक भारतीय संसद में तो कोई गुर्जर आया ही नही था। यदि गुजरात से कोई आया होगा तो पटेल समुदाय के विशय में कोई जानकारी नही थी। कहने का अभिप्राय है कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा अस्तित्व में थी अपितु अधिक सक्रिय नही थी।

श्री अफला वर्मा का संगठन अर्थात दिल्ली प्रदेष गुर्जर महासभा सक्रिय थी एजेन्डा कुरीति निवारण, समाज में षिक्षा का प्रचार एवं प्रसार अपितु अधिक लोग नही जुड़ पाये थे बैठके लगातार होती थी और प्रभावी भी थी धीरे-2 संगठन बनता गया कारवा बढ़ता गया और लोग जुडते गये। एक दिन षाम के वक्त मैं चौ0 करणसिंह तत्कालीन सहायक निदेषक उद्यान सी.पी.डब्लू.डी. जो 18-ब्लॉक लोदी रोड में रहते थे उनके घर गया था और अक्सर चौ0 भूपालसिंह डगरपुर, चौ0 तिलकराम बीनडा, श्री अफलासिंह वर्मा, श्री धर्मपाल भड़ाना, श्री राजेन्द्र सिंह कोटला, श्री बलजीत सिंह कोटला के साथ कभी-2 मुलाकात हो जाती थी। मै अपने कार्यालय छक्डब् से अपने निवास चाणक्य पुरी जाते समय लोदी रोड से निकल जाया करता था, मेरी अभी तक दिल्ली में अच्छी पहचान नही बनी थी, श्री अफलासिंह ने मुझ से सभा में जुडने का आग्रह किया जिसमें मैने नम्रता पूर्वक असमर्थता प्रकट की चूकि घर की जिम्मेदारी भी मेरी ही थी और मेरा परिवार गॉव में रहता था और में साप्ताहिक छुट्टी में गॉंव जाया करता था।