

शà¥à¤°à¥€ अफलासिंह वरà¥à¤®à¤¾ ने 1960 में à¤à¤• संगठन दिलà¥à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· में बनाया था जिसका नाम उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दिलà¥à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· गà¥à¤°à¥à¤œà¤° सà¤à¤¾ रखा, शà¥à¤°à¥€ अफलासिंह वरà¥à¤®à¤¾ ने कà¥à¤› नवयà¥à¤µà¤•ो को विषेशत जो राजकीय सेवा में थे, इकà¥à¤Ÿà¥à¥à¤ ा करके à¤à¤• संगठन बनाया था। जिसकी बैठके गॉव-2 में हà¥à¤† करती थी वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ बैठक में यह तय हो जाता था कि अगली बैठक उस गॉव में होगी, और कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° लोग उसी गॉंव में पहà¥à¥…च जाते थे, आतिथà¥à¤¯ के नाम पर गॉंव की चौपाल और विछाने के लिये पलà¥à¤² लेते थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ यह à¤à¥€ तय किया था कि गॉंव वालो से बैठक के दिन चाय नही पियेगें तब लोग अपने -2 साधन से उस गॉंव तक पहà¥à¤šà¤¤à¥‡ थे। पà¥à¤°à¤¾à¤¯ दोपहर बाद का समय रखा जाता था संगठन के कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के नाम पर वरà¥à¤®à¤¾ जी के सà¥à¤•ूटर पर à¤à¤• बà¥à¤°à¥€à¤«à¤•ेस जिसमें à¤à¤• रजिसà¥à¤Ÿà¤° होता था, जिसमें आने वाले लोगो की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤µà¤‚ बैठक की कारà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¹à¥€ होती थी।
1965 के अखिल à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤œà¤° समाज सà¥à¤§à¤¾à¤° सà¤à¤¾ का बदरपà¥à¤° में समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ हà¥à¤† यह अति विषाल और à¤à¤µà¥à¤¯ था और इसमें अगले अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ हà¥à¤† था सà¤à¤¾ का गठन हà¥à¤† था सà¤à¤¾ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· पद पर लेफà¥à¤Ÿà¥€0 करà¥à¤¨à¤² गिरधारी सिंह को मनोनीत किया गया और देष के अनà¥à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤œà¤° बहà¥à¤² पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤·à¥‹ से सतà¥à¤¯ निशà¥à¤ और समाजसेवी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सà¤à¤¾ की कारà¥à¤¯à¤•ारिणी का सदसà¥à¤¯ बनाया गया था चूकि मैंने अà¤à¥€ तक सà¤à¤¾ में à¤à¤¾à¤—ीदारी नही की थी।
उस समय जो लोग आये थे वे चौ0 जसवनà¥à¤¤ सिंह मदनपà¥à¤°, चौ0 छजà¥à¤œà¤¨à¤¸à¤¿à¤‚ह सरायकाले खांॅ, चौ0 रघà¥à¤µà¤° सिंह सरायकाले खॉ,चौ0 फतह सिंह जगतपà¥à¤°, शà¥à¤°à¥€ रामचनà¥à¤¦à¥à¤° विकल विधायक उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤·, शà¥à¤°à¥€ हरिसिंह नलवा à¤à¥œà¤µà¥‹à¤•ेट, शà¥à¤°à¥€ कनà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ लाल पोशवाल मंतà¥à¤°à¥€ हरियाणा, शà¥à¤°à¥€ महाराजसिंह à¤à¥œà¤µà¥‹à¤•ेट मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤·, शà¥à¤°à¥€ लेखराजसिहं à¤à¥œà¤µà¥‹à¤•ेट बà¥à¤²à¤¨à¥à¤¦à¤·à¤¹à¤°, शà¥à¤°à¥€ नारायणसिंह कोटला, शà¥à¤°à¥€ तिलकराम, शà¥à¤°à¥€ षानचनà¥à¤¦, शà¥à¤°à¥€ राजेनà¥à¤¦, शà¥à¤°à¥€ बलजीत, शà¥à¤°à¥€ चरणसिंह पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से आये थे, महासà¤à¤¾ के सविधान की सरचना à¤à¥€ हà¥à¤¯à¥€ थी और सà¤à¤¾ का यह समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ 3 दिन का था षायद महासà¤à¤¾ के इतिहास मे यह सबसे à¤à¤µà¥à¤¯ à¤à¥€ था। सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ था बदरपà¥à¤° का परेड गà¥à¤°à¤¾à¤Šà¤¨à¥à¤¡ जो अपने आकार में à¤à¥€ à¤à¤µà¥à¤¯ था और आवागमन के साधन à¤à¥€ सà¥à¤²à¤ थे। वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ अति सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° थी इस समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ में जनरल जे.à¤à¤¨. चौधरी à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सेना अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· को विषेश रूप से आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया गया चूंकि गà¥à¤°à¥à¤œà¤° रेजिमेनà¥à¤Ÿ सेना में बने यह पà¥à¤°à¤®à¥à¤– मांग रखी गयी थी अनà¥à¤¯ ततà¥à¤•ालीन मांग à¤à¥€ थी। और जमà¥à¤®à¥‚ कषà¥à¤®à¥€à¤° से वजीर मो0 हाकॅंला, मो0 षमी खटाना, मिया बषीर अहमद, चौ0 गà¥à¤²à¤œà¤¾à¤° अहमद, चौ0 लाल मोहमà¥à¤®à¤¦ साविर, मौ0 असलम à¤à¥€ आये हà¥à¤ थे वही पंजाब से à¤à¥€ कई सरदार गà¥à¤°à¥à¤œà¤° à¤à¥€ आये थे, इस पà¥à¤°à¤•ार यह à¤à¤• गà¥à¤°à¥à¤œà¤° संसà¥à¤•ृति का संगम था।
इसमें करà¥à¤¨à¤² गिरधारीसिंह अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· à¤à¤µà¤‚ चौ0 नारायण सिंह को महामंतà¥à¤°à¥€ बनाया गया यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ चौ0 जसवनà¥à¤¤ सिंह ही सà¤à¤¾ का कारà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤° समà¥à¤à¤¾à¤² लेते थे। इसके पषà¥à¤šà¤¾à¤¤ अखिल à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤œà¤° महासà¤à¤¾ का कारà¥à¤¯ था केवल हर 5 वरà¥à¤¶ के वाद जो à¤à¤®.à¤à¤².à¤. चà¥à¤¨à¤•र आते थे उनका अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨ करते थे। 1971 तक à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसद में तो कोई गà¥à¤°à¥à¤œà¤° आया ही नही था। यदि गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ से कोई आया होगा तो पटेल समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के विशय में कोई जानकारी नही थी। कहने का अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¯ है कि अखिल à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤œà¤° महासà¤à¤¾ असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में थी अपितॠअधिक सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ नही थी।
शà¥à¤°à¥€ अफला वरà¥à¤®à¤¾ का संगठन अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ दिलà¥à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤· गà¥à¤°à¥à¤œà¤° महासà¤à¤¾ सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ थी à¤à¤œà¥‡à¤¨à¥à¤¡à¤¾ कà¥à¤°à¥€à¤¤à¤¿ निवारण, समाज में षिकà¥à¤·à¤¾ का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° अपितॠअधिक लोग नही जà¥à¥œ पाये थे बैठके लगातार होती थी और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ à¤à¥€ थी धीरे-2 संगठन बनता गया कारवा बà¥à¤¤à¤¾ गया और लोग जà¥à¤¡à¤¤à¥‡ गये। à¤à¤• दिन षाम के वकà¥à¤¤ मैं चौ0 करणसिंह ततà¥à¤•ालीन सहायक निदेषक उदà¥à¤¯à¤¾à¤¨ सी.पी.डबà¥à¤²à¥‚.डी. जो 18-बà¥à¤²à¥‰à¤• लोदी रोड में रहते थे उनके घर गया था और अकà¥à¤¸à¤° चौ0 à¤à¥‚पालसिंह डगरपà¥à¤°, चौ0 तिलकराम बीनडा, शà¥à¤°à¥€ अफलासिंह वरà¥à¤®à¤¾, शà¥à¤°à¥€ धरà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤² à¤à¥œà¤¾à¤¨à¤¾, शà¥à¤°à¥€ राजेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह कोटला, शà¥à¤°à¥€ बलजीत सिंह कोटला के साथ कà¤à¥€-2 मà¥à¤²à¤¾à¤•ात हो जाती थी। मै अपने कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ छकà¥à¤¡à¤¬à¥ से अपने निवास चाणकà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥€ जाते समय लोदी रोड से निकल जाया करता था, मेरी अà¤à¥€ तक दिलà¥à¤²à¥€ में अचà¥à¤›à¥€ पहचान नही बनी थी, शà¥à¤°à¥€ अफलासिंह ने मà¥à¤ से सà¤à¤¾ में जà¥à¤¡à¤¨à¥‡ का आगà¥à¤°à¤¹ किया जिसमें मैने नमà¥à¤°à¤¤à¤¾ पूरà¥à¤µà¤• असमरà¥à¤¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤•ट की चूकि घर की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥€ मेरी ही थी और मेरा परिवार गॉव में रहता था और में सापà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¿à¤• छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ में गॉंव जाया करता था।